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Ignite the writer in you , write answer and get rewarded. Is India ready for simultaneous Lok Sabha and state assembly elections?

Pankaj Dubey

@ | Posted 06 Jun, 2018 | Current Topics

क्या भारत एक साथ लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों के लिए तैयार है?

Answers

Rakesh Singh

Delhi Press | Posted 23 Jun, 2018

भारत में एक साथ चुनाव - हमारे जैसे बड़े राष्ट्र के लिए काफी आदर्श और उपयुक्त लगता है। हालांकि, इस महान विचार के रूप में रास्ते में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है,और ऐसे देश में जहां हर कोने में राजनीतिक असंतोष मौजूद है, ये चुनौतियां बहुत बड़ी हैं।
सामूहिक कदाचार की संभावना :-
भारत का निर्वाचन आयोग पहले से ही एक चुनिंदा पार्टी का पक्ष लेने का दबाव में है। चुनाव में उपयोग की जाने वाली ईवीएम मशीनें अत्यधिक संदिग्ध हैं। यदि हम केंद्र और राज्य स्तर के चुनावों पर एक साथ जाते हैं,और इस प्रणाली से अभी समझौता किया जाये, तो यह सामूहिक कदाचार का एक बड़ा मौका है।
चुनाव सिंक्रनाइज़ करना मुश्किल है :-
यदि हम इस दिशा में जाते हैं, तो पहली बाधा सभी केंद्रीय और राज्य स्तरीय चुनावों को समान कर रही है, जो अब से लगभग 4 साल लग सकते हैं। जैसे, 2019 में,लोकसभा के दौरान, कुछ राज्यों का कार्यकाल बढ़ाना होगा, और दूसरों को कम करना होगा।

Sher Singh

@ | Posted 16 Jun, 2018

बहुत ही अच्छा प्रश्न पूछा है आपने। जो प्रश्न है उसके हिसाब से सबकी अपनी-अपनी राय है, और हर किसी की अपनी सोच है। हर कोई इस प्रश्न पर अपना पक्ष रख रहा है । कुछ लोगों का मानना है कि अगर भारत में लोकसभा और तमाम राज्यों के विधानसभा के इलेक्शन एक साथ होते हैं तो इससे काफी फायदे रहेंगे जबकि बहुत सारे लोगों का मानना यह है कि अगर भारत में लोकसभा इलेक्शन और तमाम राज्यों के विधानसभा इलेक्शन एक साथ होते हैं तो इसके बहुत सारे नुकसान है और फायदे की जगह काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


चुनाव का यह आईडिया भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है । बताया जाता है कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे तो इससे खर्च काफी कम होंगे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद के दोनों सदनों को सम्बोधित करते हुए भी इस विचार को प्रकट किया | उन्होंने संसद में कहा, "देश के किसी न किसी हिस्से में लगातार हो रहे चुनाव अर्थव्यवस्था और विकास पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को लेकर चिंता है... इसलिए एक साथ चुनाव कराने के विषय पर चर्चा और संवाद बढ़ना चाहिए,तथा सभी राजनैतिक दलों के बीच सहमति बनानी चाहिए "

अगर देखा जाए तो लोकसभा और विधानसभा का चुनाव कराना एक साथ बहुत मुश्किल है मगर नामुमकिन नहीं है मुश्किल इसलिए है क्योंकि की सिर्फ विधानसभा के इलेक्शन में ही बहुत सारे बूथों पर अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है और वहां के दबंग लोग भारी सुरक्षा में भी सेंध लगा देते हैं । जहां तक बात है की क्या सरकार लोकसभा विधानसभा के इलेक्शन एक साथ कराने के लिए तैयार है तो बहुत सीधी सी बात है कि विपक्ष को बिना अपने साथ लिए यह नहीं हो सकता है।इसी तरह से चुनाव आयोग भी एक साथ दोनों तरह के चुनाव करा सकेगा या नही? लोकसभा विधानसभा के इलेक्शन एक साथ कराने हैं तो मोदी सरकार को तमाम विपक्षी पार्टियों के नेताओ की राय से ही फैसला लेना होगा।