रिजर्व बैंक इनकम टैक्स सीबीआई मीडिया चुनाव आयोग तो क्या अब सुप्रीम कोर्ट की बारी है - LetsDiskuss
LetsDiskuss Logo
Gallery
Create Blog

रिजर्व बैंक इनकम टैक्स सीबीआई मीडिया चुनाव आयोग तो क्या अब सुप्रीम कोर्ट की बारी है

इन 5 सालों में हमारे देश में ऐसी घटनाएं हुई जो शायद पहले कभी भी भारत के इतिहास में नहीं हुई थी| यह हो सकता है और इसकी पूरी संभावना भी है कि कुछ ताकतें, जो कि स्पष्ट है कि वे कौंन होंगीं गोगोई और न्यायपालिका को चलने नहीं देना चाहती हैं। हो सकता है कि वे कुछ बड़े मामलों की सुनवाई जल्द न हो यह सुनिश्चित करना चाहती हों। ऐसा है तो स्त्रियों के इस कानूनी ताकत का बेजा इस्तेमाल अन्ततः स्त्रियों के खिलाफ जायेगा। यह स्त्रीवाद के खिलाफ एक परिघटना सिद्ध होगी-एक धार तो स्त्रीवाद की गर्दन पर यह हुई। इन सभी मामलों को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया था कि न्यायपालिका कि स्वतंत्र खतरे में है तो लीजिए अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आ गये लपेटे में........! सोचिए ‘बड़ी ताकत’ का कितना बड़ा डर है! इतनी बड़ी खौफ, कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई भी डर गए. गोगोई के खिलाफ एक महिला ने सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई. लेकिन सीजेआई इस आरोप से नहीं डरे. बल्कि उन्होंने आरोपों के बीच अपना नियमित कामकाज करने का हौसला दिखाया. सीजेआई के मुताबिक महिला का क्रिमिनल रिकार्ड है. इसकी वजह से उसे 4 दिनों तक जेल में भी रहना पड़ा है. यहां तक कि पुलिस भी महिला के व्यवहार को लेकर उसे चेतावनी दे चुकी है. सो डरने की बात ये नहीं. सीजेआई ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि महिला के आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए. लेकिन गोगोई साहब डरे हुए हैं. उस साजिश की भनक की वजह से, जिसमें उन्हें लगता है कोई बड़ी ताकत न्यापालिका और सीजेआई के ओहदे को निष्क्रीय करने में लगी है. सीजेआई का बयान सुनिए- ‘स्वतंत्र न्यायपालिका को अस्थिर करने के लिए बड़ी साजिश की गई है. जरूर इन आरोपों के पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं.’ कही गोगोई साहब के कहने का मतलब ये तो नहीं कि अगले हफ्ते वो कुछ अहम मामलों की सुनवाई करने वाले हैं जिसमें राफेल, राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका, पीएम मोदी की बॉयोपिक के रिलीज के साथ-साथ तमिलनाडु में वोटरों को कथित तौर पर रिश्वत देने की वजह से वहां चुनाव स्थगित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई शामिल है. संतों का समाज तो पहले से ही राम मंदिर पर फैसला नहीं सुनाने की वजह से नाराज थे. जाहिर है उनके समर्थक सत्ता में भी होंगे. सुप्रीम कोर्ट से अलग रहते हुए भी गोगोई साहब ने देखा होगा कैसे देश की कई तमाम संस्थाओं को ध्वस्त किया गया. या तो उनके नाम बदल गए या फिर अपनी कमान में लेकर पंगु बनाया गया. रिजर्व बैंक, सीबीआई, मीडिया, चुनाव आयोग आदि इसकी मिसाल है. तो क्या अगला नंबर सुप्रीम कोर्ट का है? क्या पता. लेकिन दाद देनी पड़ेगी सीजेआई की हिम्मत का. उन्होंने डंटे रहने का ऐलान करते हुए कहा- ‘मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा।’ सही बात, अगर देश में न्याय की अंतिम उम्मीद जगाने वाला ही डर गया तो फिर समझो हम सब तो तानाशाही के चंगुल में फंसे… तो अब समझे आखिर क्यों बार-बार कहा जाता रहा की नामुमकिन अब मुमकिन है

Pravesh Chauhan

@ pravesh chauhan BA(honours) journalism & mass communication | Posted 21 Apr, 2019 | Current Topics