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लॉकडाउन का एक महीना हुआ पूरा आपके जीवन में क्या बदलाव आए हैं?


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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | Posted on


जिंदगी में पहले कभी नहीं सोचा था कि एक वायरस की वजह से ऐसा भी हो सकता है कि महीनों तक घर पर ऐसे ही बैठना पड़ेगा कहीं आ जा नहीं सकते हैं कहीं घूम नहीं सकते हैं यानी कि पूरा दिन आपको एक ही कमरे में बिताना पड़ेगा इन दिनों वायरस के मामले को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मैं कोई सपने की दुनिया में आ चुका हूं और एक फिल्म देख रहा हूं.

एक जो नया बदलाव आया आलस पन छा गया है कोई भी काम करने का बिल्कुल भी मन नहीं करता बस ऐसा लगता है जैसे धरती का बोझ बन चुका हूं इन दिनों में मैंने बहुत कुछ महसूस किया. खाली बैठे बैठे कोई भी काम करने का मन नहीं करता है कॉलेज का असाइनमेंट बनाना हो या पढ़ाई करनी हो बिल्कुल भी मन इन सब कामों में नहीं लग रहा है इसका भी एक कारण है कि ज्यादातर ध्यान वायरस पर ही लगा रहता है और कुछ कारण यह भी है कि घर पर बैठने की वजह से अब  बिल्कुल भी चारदीवारी में कैद रहने का मन नहीं करता अब फैमिली में पैसों की दिक्कत होने लगी है लाजमी सी बात है कि कोई भी कंपनी का मालिक पैसे कहां से लाकर देगा जब कंपनी नहीं चल रही है.

सबसे खास बात यह देखी कि जरूरी नहीं है पैसा ही आपके पास होगा तो आप जिंदगी जी सकते हैं कई बार ऐसा होने पर भी आपको वह चीजें नहीं मिल सकती जो आपको मिलनी चाहिए मान लिया अगर राशन की किल्लत हो जाते हैं और राशन नहीं है पीछे से भी राशन नहीं आ रहा हम दुकानदार के पास राशन खरीदने जाएंगे तो वह भी में राशन नहीं देगा क्योंकि वह पहले अपना पेट देखेगा बाद में दूसरों का अगरम दुकानदार को कितना भी पैसा क्यों ना देते हैं तब भी वह हमें राशन नहीं देगा क्योंकि वह राशन उस दुकानदार की और उसके घर वालों के काम आएगा यानी कि ऐसे समय में आपके पास करोड़ों रुपए पड़े हो वह भी सिर्फ एक कागज के समान रह जाते हैं उनका भी कोई महत्व नहीं रह जाता है.

इन दिनों में यह भी देखा कि ऐसे मुश्किल समय में भी हमारे देश की राजनीतिक पार्टियां अपनी घटिया राजनीति नहीं करना छोड़ रहे हमारी देश की मीडिया बिल्कुल ही अपने पत्रकारिता के सबसे चाटुकारिता के चरण में आ चुके हैं एक तरफ जहां पूरी दुनिया वायरस से लड़ रही है मगर हमारा देश हिंदू मुस्लिम एक दूसरे से लड़ रहा है इस पूरे मामले को हिंदू-मुस्लिम कर दिया जाता है और मुस्लिमों को इस वायरस पिलाने का मुख्य आरोपी मान लिया जाता है मानते हैं कि इतिहास मुस्लिम बादशाहों के कुछ अपराधों की वजह से भरे हुए हैं मगर इसका मतलब यह नहीं कि अब इन अपराधों की सजा आज मुस्लिमों को दी जाए यह बिल्कुल भी उचित नहीं है कुछ सालों से मुस्लिम पर वैसे भी अत्याचार देखे जा रहे हैं और हिंदुओं पर भी मगर यह नहीं देखा था कि ऐसे मुश्किल हालातों में भी षड्यंत्र रच कर मुस्लिमों को पूरा बदनाम करके उनके खिलाफ ऐसी लहर चला दी जाती है मानो वहां से वायरस मुस्लिम ही लेकर आया है यह चीज बिल्कुल भी पसंद नहीं आए ऐसी घटिया राजनीति करना बिल्कुल भी योग्य नहीं है.

इन दोनों कुछ दलाल पत्रकार टीवी में बकबक करके लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं अभी कुछ दिनों पहले ही सोनिया गांधी पर एक पत्रकार द्वारा आपत्तिजनक शब्दों से हमला किया जाता है यह भी पहली बार देखा जब किसी पत्रकार ने पार्टी की मुखिया को इस तरह शब्द उपयोग करके उसका मानहानि कर देता है जैसे वह कुछ है ही नहीं.

इन दिनों यह भी देखा कि जिस समय मीडिया को देश में शांति लाने के लिए और लोगों को वायरस से ना डरने की सलाह देनी चाहिए ऐसे समय में मीडिया वाले देश में जहर बोने का काम कर रहे हैं.

कॉलेज जाता था तो मन करता था कि घर पर आराम से बैठ जाओ और छुट्टियां पड़ जाए क्योंकि पूरा दिन कॉलेज में ही बीत जाता था और आराम करने का मौका भी नहीं मिलता था मगर अब जब हम आराम ही मिल गया तो अब आराम करना भी हराम लग रहा है इससे अच्छा लगता था कि कॉलेज में ठीक था कम से कम समय तो पास हो जाता था अब तो वह भी नहीं रहा उम्मीद है कि जल्द ही भारत को रोना वायरस से मुक्ति पाएगा और फिर से जनजीवन पटरी पर लौट आएगा.

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