शार्ट थ्रो प्रोजेक्टर कैसे काम करते हैं ? - letsdiskuss
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Rohit Valiyan

Cashier ( Kotak Mahindra Bank ) | Posted on | Science-Technology


शार्ट थ्रो प्रोजेक्टर कैसे काम करते हैं ?


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Engineer,IBM | Posted on


जब प्रोजेक्टर के बारे में चर्चा करने की बात आती है तो थ्रो एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में महत्वपूर्ण विचार किया जाना चाहिए। आम तौर पर "थ्रो" प्रोजेक्टर और स्क्रीन के बीच की दूरी और हमारे मनचाहे स्क्रीन के आकार के लिए प्रयोग किया जाता है । यह शार्ट थ्रो प्रोजेक्टर वह प्रोजेक्टर है जिनका इस्तेमाल प्रोजेक्टर से स्क्रीन पर एक बड़ी छवि बनाने के लिए होता है। इन शार्ट प्रोजेक्टर का उपयोग घर, व्यवसाय व स्कूलों में शैक्षिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है।


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शार्ट थ्रो प्रोजेक्टर में डाले गए लेंस द्वारा इसे निर्धारित किया जा सकता है। शार्ट थ्रो प्रोजेक्टर में डाले गए लेंस बहुत ही उचित हैं क्योंकि इसमें कांच की थोड़ी मात्रा होती है। 60 इंच का डिस्प्ले बनाने के लिए यह लगभग 3 फीट दूरी पर रखा जाता है। कई लोगों ने व्यवसाय, स्कूलों या शैक्षिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न प्रोजेक्टरों को लोगो ने अपनी युवावस्था में उपयोग किया है । वे घर पर एक छोटा प्रोजेक्टर भी रखते हैं । शार्ट थ्रो प्रोजेक्टरों में फिक्स लेंस होता है क्योंकि इसे अधिकतर छत पर रखा जाता है। यह याद रखना होगा कि प्रोजेक्टर को स्क्रीन के ठीक सामने न रखा जाये। वीडियो लेंस की तरफ ज़ोर से जाती है और इसलिए फिल्म के दौरान सही कोण प्रस्तुति अवांछित बाधाओं को समाप्त करके होती है । प्रोजेक्टर के लंबे मॉडल से अलग शॉर्ट थ्रो प्रोजेक्टर के कई लाभ हैं। सही प्रोजेक्टर के साथ, व्यक्ति बड़ी स्क्रीन के साथ सर्वश्रेष्ठ होम थिएटर का आनंद ले सकता है । 


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