भाई सच बताऊँ तो इसके पीछे कोई रॉकेट साइंस नहीं है, लोग बस मज़े लेते हैं!
सबसे बड़ा कारण तो ये होता है कि सेटिंग्स में जाकर लोग खुराफात करते हैं और अपना नाम 'डॉन', 'बॉस', 'पापा' या 'बैटमैन' सेव कर देते हैं। फिर जब दोस्त आस-पास बैठे होते हैं तो भौकाल बनाने के लिए ज़ोर से पूछते हैं- "हे गूगल, मेरा नाम क्या है?" और जब गूगल अपनी मशीन वाली आवाज़ में पूरी सीरियसनेस के साथ बोलता है "आपका नाम बॉस है", तो बस उस 2 सेकंड के स्वैग और दोस्तों के ठहाकों के लिए लोग ये करते हैं।
दूसरा, जब भी कोई नया फोन या स्मार्ट स्पीकर लेता है, तो सबसे पहले उसे यही चेक करना होता है कि भई ये काम भी कर रहा है या नहीं। मेरी आवाज़ पहचान भी रहा है कि नहीं?
और एक सच ये भी है कि जब हम अकेले बैठे-बैठे बोर हो रहे होते हैं और फोन में स्क्रॉल करने को कुछ नहीं बचता, तो टाइमपास के लिए गूगल से ऐसी ही ऊल-जलूल बातें करते हैं। कभी गाना गवाते हैं, तो कभी अपना ही नाम पूछ लेते हैं। एक तरह से अकेलेपन में किसी से बात करने का फील आ जाता है।