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मोदी जी सत्ता में वापिस लौटे तो क्या सच में इस बार उनके काम की बड़ी लहर उठेगी?


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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | Posted on


जिस लहर पर सवार होकर नरेंद्र मोदी 2014 के चुनावों में पूर्ण बहुमत के साथ आए थे आज वह लहरें प्रदूषित हो गई है| किसे पता था कि अमेरिका में जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहरें  खूब नाम कमाएंगी.जिन लहरों के दम पर नरेंद्र मोदी ने देश के विभिन्न राज्यों को अपने कब्जे में ले लिया था आज उन्ही लहरों की वजह से देश का माहौल तनावपूर्ण हो गया है| या ऐसा भी कह सकते हैं कि लहरें नरेंद्र मोदी को अपने अंदर समा चुकी हैं. क्योंकि लहरों को भी पता लग गया अगर ऐसे ही मोदी का साथ दिया गया तो लोगों का लहरों पर से खौफ खत्म हो जाएगा इसलिए लहरों ने भी अपना रुख धीमा कर लिया है| हालांकि आप को अभी भी लहरें मीडिया में जरूर दिखाई देंगी|

मोदी की बड़ी लहरे इस कदर उठ चुकी है कि यह प्रदूषित लहरें अमेरिका तक जा पहुंची हैं लहरों की वजह से मोदी जी अमेरिका में भी अब चर्चा में आए हुए हैं| अमेरिका के टाइम्स पत्रिका ने मोदी को इंडिया डिवाइडर इन चीफ' यानी भारत को प्रमुख रुप से बांटने वाला' बताया है| टाइम पत्रिका के एशिया एडिशन ने लोकसभा चुनाव 2019 और पिछले पांच सालों में नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज पर लीड स्टोरी की है| मोदी की लहरोें के दौरान देश में क्या-क्या हुआ किस तरह 5 साल में नफरत की राजनीति हुई, किस तरह सेना को अपने चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया, किस तरह हिंदु, मुस्लिम, दलित एक दूसरे को अलग नजरिए से देख रहे हैं. आपको इस मैगजीन के लेख में पता चल जाएगा|

सत्ता में वापस आते ही यह बड़ी लहरें सबसे पहले तो जेट एयरवेज को देश से उड़ा डालेगी.उसके बाद बीएसएनल को ले डूबेगी फिर वीडियोकॉन को सड़क पर ला देगी हालांकि इतनी बड़ी बड़ी खबरें दिखाने पर मीडिया खामोश  इसलिए है कि अगर वह यह खबरें दिखाती है तो नरेंद्र मोदी को चुनावों में नुकसान हो सकता हैं| बाकी इन लहरों की वजह से बेरोजगारी तो सबके सामने है ही|Letsdiskuss
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Blogger | Posted on


2014 के चुनाव में जनता ने मोदीजी पर काफी भरोसा जताया था। उनका जज्बा, गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अनुभव और दिए गए वादों पर यकीन कर लोगो ने उन्हें ना सिर्फ सराहा पर दिल्ली की गद्दी भी उनकी झोली में डाल दी। पूर्ण बहुमत के जोर और अनलिमिटेड सत्ता के चलते मोदीजी ने जीएसटी और नोटबंदी जैसे निर्णय लिए और इन गलत निर्णयों को सही ठहराने की भी हर मुमकिन कोशिश की। सत्ता में पांच साल होने के बावजूद वो अपनी पांच कामियाबियाँ नहीं गिनवा पा रहे है।


फिर भी मार्केटिंग के जोर पर हो सकता है की मोदीजी वापिस दिल्ली में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे। अगर ऐसा हुआ तो इस बार उन्हें वो सब करना पडेगा जिसका उन्होंने 2014 में वादा किया था।


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सौजन्य: बिज़नेस टुडे 

उस वक्त उनके वादे इतने बड़े थे की अभी उनको खुद को भी ऐसा लग रहा होगा की उन्हें पूरा करना नामुमकिन है। फिर से एक बार चुनाव जीतने से उनको सफलता के लिए और प्रयास करने पड़ेंगे और सही कदम उठाने होंगे जिस से प्रजा का उनपर भरोसा बना रहे। पर सवाल यह है की क्या वो ऐसा कर पाएंगे? उनके काम करने के तौर तरीको और दुसरो की सलाह ना मानने को देखते हुए ऐसा लगता नहीं की अब उनके काम की कोई बड़ी लहर उठ भी सकती है। 



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