
Khatu Shyam Temple: मान्यता है कि कलयुग में हनुमान जी और खाटू श्याम बाबा को कोई भी पुकारता है तो वह हारे के सहारे के रूप में संकट हरने के लिए जरूर मदद करते हैं। आज हम आपको खाटू श्याम बाबा के बारे में बताने जा रहे हैं। इससे पहले हम आपको बता दें कि स्कंद पुराण के माहेश्वर खंड में बर्बरीक यानी खाटू श्याम जी की कथा दी गई है वहां पर तीन बाणों की प्राप्ति और शीश दान का वर्णन भी मिलता है।
ऐतिहासिक प्रमाण के बारे में भी आपको बताते चले कि खाटू गांव में 1084 ईस्वी में राजा रूपसिंह चौहान द्वारा पहला मंदिर बनवाने का शिलालेख और ऐतिहासिक जानकारी मिलती है।

जब इंसान हर तरफ से हताश हो जाता है और उसे कोई रास्ता नज़र नहीं आता, तब खाटू श्याम जी की कृपा उसका मार्ग प्रशस्त करती है। इसी वजह से पूरे विश्व में यह जयकारा गूंज रहा है: "हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।"
कलयुग में खाटू श्याम जी कौन हैं?
शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसा, कलयुग में दो ही देवता प्रत्यक्ष रूप से भक्तों के कष्ट हरते हैं—पवनपुत्र हनुमान जी और श्री कृष्ण के ही अवतार खाटू श्याम जी।
खाटू श्याम जी वास्तव में महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक हैं। जो भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्हें कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के 'श्याम' नाम से पूजे जाने का वरदान मिला है।
पौराणिक कथा: बर्बरीक से खाटू श्याम बनने का सफर
बर्बरीक बचपन से ही अत्यंत वीर और देवी दुर्गा के भक्त थे। देवी की तपस्या करके उन्होंने तीन ऐसे अचूक बाण प्राप्त किए थे, जो एक ही पल में पूरे ब्रह्मांड के युद्ध का परिणाम तय कर सकते थे।
पहला बाण निशानों को चिन्हित करता था, दूसरा रक्षा करता था, और तीसरा बाण शत्रु का विनाश करके वापस लौट आता था।
मां को दिया वचन: "हारते हुए का साथ दूंगा"
जब महाभारत का युद्ध होना था तो बर्बरीक ने भी युद्ध में शामिल होने की इच्छा जताई। माता ने उन्हें युद्ध में जाने की आज्ञा तो दी, लेकिन एक वचन लिया: "तुम युद्ध में हमेशा हारने वाले पक्ष का ही साथ दोगे।"
श्री कृष्ण की परीक्षा और शीश का दान की कहानी
भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि अगर बर्बरीक युद्ध भूमि में आ गए तो महाभारत की नीतियां और धर्म की स्थापना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।
अगर पांडव हारने लगेंगे तब बर्बरीक पांडवों की तरफ हो जाएंगे और कौरव घटने लगेंगे। फिर कौरव हारने लगेंगे, तो बर्बरीक कौरवों की तरफ चले जाएंगे। इस प्रकार दोनों पक्षों का सर्वनाश हो जाएगा।
बर्बरीक की परीक्षा लेने के लिए श्री कृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर बर्बरीक की परीक्षा ली और दान में उनका शीश मांग लिया। बर्बरीक समझ गए कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं हैं। श्री कृष्ण के वास्तविक रूप के दर्शन कर बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश काटकर उनके चरणों में अर्पित कर दिया।
खाटू श्याम जी को मिला वरदान भक्तों के करते है बेड़ा पार
बर्बरीक के इस परम त्याग और निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें दो महान वरदान दिए:
बर्बरीक का शीश एक ऊंचे पहाड़ पर स्थापित किया गया, जहां से उन्होंने संपूर्ण महाभारत युद्ध को देखा।
श्री कृष्ण ने कहा—"कलयुग में तुम मेरे 'श्याम' नाम से पूजे जाओगे। जो भी भक्त सच्चे मन से और हार मानकर तुम्हारे पास आएगा, तुम उसके सब दुखों को हरकर उसका सहारा बनोगे।"
खाटू धाम और मंदिर दर्शन गाइड
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू गांव में बाबा श्याम का भव्य और दिव्य मंदिर बना हुआ है। लगभग 1027 ईस्वी में राजा रूप सिंह चौहान द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था।
मंदिर पहुँचने का मार्ग
यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन का नाम रींगस जंक्शन जो खाटू श्याम मंदिर से लगभग 17 किमी दूर है। इस स्टेशन से आपको धाम तक पहुंचने के लिए बस और टैक्सी जैसे सस्ते साधन मिल जाते हैं।
नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर शहर में है। धाम से इसकी दूर लगभग 80 किलोमीटर है।
दर्शन एवं आरती का समय
समय / कार्यक्रम | ग्रीष्मकाल (Summer) | शीतकाल (Winter) |
|---|---|---|
मंदिर खुलने का समय | सुबह 4:30 - दोपहर 12:30 | सुबह 5:30 - दोपहर 1:00 |
संध्या दर्शन | शाम 4:00 - रात 10:00 | शाम 5:00 - रात 9:00 |
मंगला आरती | सुबह ~4:30 - 5:30 | सुबह ~5:30 - 6:00 |
श्रृंगार आरती | सुबह ~7:00 - 8:00 | सुबह ~7:30 - 8:30 |
भोग आरती | दोपहर ~12:30 | दोपहर ~1:00 |
संध्या आरती | शाम ~6:30 - 7:30 | शाम ~6:00 - 7:00 |
शयन आरती | रात ~9:00 - 10:00 | रात ~9:00 |
नोट: त्योहारों और मेले के समय मंदिर के समय में बदलाव हो सकता है।
कौन कौन से मुख्य त्यौहार यहाँ मनाया जता है
फाल्गुन मेला होली से पहले होने वाला खास मेला है। भक्तों की भीड़ रींगस से खाटू धाम तक दिखाई देती है। चारों तरफ निशान यात्रा निकालते हैं। दरअसल निशान यात्रा में बाबा को भक्त केसरिया रंग का झंडा अर्पित करते है। इस पैदल यात्रा में लाखों भक्त शामिल होते हैं। आप भी निशान यहां पर आकर खरीद सकते हैं और बाबा के मंदिर में भेट कर सकते है।
दूसरा सबसे खास उत्सव खाटू श्यसाम जी का जन्मोत्सव है। यह कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी को होता है।
घर पर खाटू श्याम जी की सरल पूजन तरीका
यदि आप खाटू धाम नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर भी भावपूर्ण पूजा कर बाबा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं:
स्थापना: उत्तर या पूर्व दिशा में एक स्वच्छ चौकी पर पीला/लाल कपड़ा बिछाकर बाबा श्याम की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
श्रृंगार व अर्पण: बाबा को जल छिड़ककर स्वच्छ करें। गुलाब या केसरिया फूल, मोरपंख और इत्र अर्पित करें।
दीप व धूप: शुद्ध देसी घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
भोग: सात्विक भोग जैसे दूध, पेड़ा, या बाबा का प्रिय खीर-चूरमा अर्पित करें।
मंत्र व पाठ:
मूल मंत्र: ॐ श्री श्याम देवाय नमः
"जय श्री श्याम" का जाप करें तथा श्याम चालीसा का पाठ करें।
आरती: प्रेमपूर्वक आरती गाएं और भूल-चूक की क्षमा मांगें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र. 1: बाबा खाटू श्याम को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में हमेशा हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। श्री कृष्ण के वरदान के कारण कलयुग में जो भी भक्त जीवन की परिस्थितियों से निराश और हार चुका होता है और बाबा श्याम उसकी पुकार सुनकर उसका सहारा बनते हैं।
प्र. 2: खाटू श्याम जी को चढ़ाया जाने वाला 'निशान' क्या होता है?
उत्तर: निशान एक तरह का ध्वज (झंडा) होता है। यहा केसरिया, लाल या गुलाबी रंग का होता है। इस पर बाबा श्याम की तस्वीर या मोरपंख का चित्र बना होता है। भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर रींगस से खाटू धाम तक पैदल चलकर यह निशान चढ़ाते हैं।
प्र. 3: खाटू श्याम मंदिर के पास स्थित 'श्याम कुंड' का क्या महत्व है?
उत्तर: मान्यता है कि श्याम कुंड वही जगह है जहां से बाबा श्याम का शीश प्रकट हुआ था। इस कुंड के पवित्र जल में नहाने शरीर के रोग दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।
प्र. 4: खाटू श्याम जी का मुख्य प्रसाद क्या है?
उत्तर: बाबा श्याम को मुख्य रूप से खीर और चूरमे का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा पेड़े और मावे का प्रसाद खास तौर पर चढ़ाया जाता है।
जय श्री श्याम! "खाटू में बैठा मेरा बाबा श्याम, बनाता सबके बिगड़े काम।"







