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Anita Pandey

| Posted on | science-technology


प्रदूषण एक गंभीर संकट।

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विश्व की सबसे गंभीर समस्या है “प्रदूषण” भारत में भी वायु प्रदूषण दिन -प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है। आज भारत और कई देशों में वायु, जल, और मिटटी का प्रदूषण सर चढ़कर बोल रहा है। भारत में बड़ी -बड़ी सड़कों का निर्माण करने की वजह से वृक्षों को नियमित रूप से काटा जा रहा है। सड़कों पर प्रति दिन और रात भागते हुए वाहन और गाड़ियां जहरीली गैस छोड़ती है। यह जहरीली गैस वायु को प्रदूषित कर देता है। यह वायु में जलीय वाष्प के साथ मिलकर वायु को भयंकर रूप से प्रदूषित करता है। रोज़ हम इसी वातावरण में सांस लेते है और जीते है। वायु प्रदुषण से हमारे शरीर को काफी नुक्सान पहुँचता है। बड़े-बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में भारी मात्रा में वायु और जल प्रदूषण के नतीजे मिल रहे है। दिल्ली प्रदूषण के मामले में सबसे ऊपर है। इससे जीव-जंतुओं और मनुष्यप्रदूषण एक गंभीर संकट।

को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वायु प्रदूषण से कई तरह की बीमारियां मनुष्य को हो रही है। ध्वनि प्रदूषण भी एक गंभीर समस्या है। सड़कों में बढ़ते हुए गाड़ियों की ध्वनियों से मनुष्य को घुटन और सरदर्द जैसी बीमारियां होती रहती है। मनुष्य की स्वार्थ भावना की वजह से प्रदूषण जैसी समस्याएं उतपन्न हो रही है। मनुष्य बड़ी -बड़ी इमारतें और कारखाने बनाने के लिए वनो और वृक्षों को निर्दयता पूर्वक काट रहे है। वृक्षों की वजह से वर्षा होती है। वर्षा की मात्रा पृथ्वी पर प्रदूषण की वजह से कम होती जा रही है। वृक्ष और पेड़ पौधे अगर जीवित रहेंगे तो प्रदूषण की समस्या से हम निपट सकते है। पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन को पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त कर देने का नाम ही प्रदूषण है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ सभी प्रकार के जीवों को भारी हानि पहुँच रही है। हवा,पानी, मिट्टी आदि सभी दूषित हो रहा है। इसका मुख्य कारण है कि प्रकृति द्वारा निर्मित वस्तुओं एवं व्यवस्थाओं को जब मानव निर्मित हानिकारक वस्तुओं के साथ मिला दिया जाता है तो जल,थल अथवा वायुमण्डल सभी क्षेत्रों में विनाशकारी तत्वों का जन्म आरंभ हो जाता है। प्राकृति की संरचनाओं के अनुसार पृथ्वी और आकाश के मध्य एक परत है जोकि सम्पूर्ण पृथ्वी को सुरक्षित रखने में सहायक है जोकि पृथ्वी के बहुत ही नजदीक है।

POLLUTION || TYPES OF POLLUTION || SCIENCE VIDEO FOR KIDS - YouTube

प्रदूषण के प्रकार:

1.वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक प्रदूषण माना जाता है, इस प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। इन स्त्रोतों से निकलने वाला हानिकारक धुआं लोगो के लिए सांस लेने में भी बाधा उत्पन्न कर देता है। दिन प्रतिदिन बढ़ते उद्योगों और वाहनों ने वायु प्रदूषण में काफी वृद्धि कर दी है। जिसने ब्रोंकाइटिस और फेफड़ो से संबंधित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी कर दी है।

2.जल प्रदूषण

उद्योगों और घरों से निकला हुआ कचरा कई बार नदियों और दूसरे जल स्त्रोतों में मिल जाता है, जिससे यह उन्हें प्रदूषित कर देता है। एक समय साफ-सुथरी और पवित्र माने जानी वाली हमारी यह नदियां आज कई तरह के बीमारियों का घर बन गई है क्योंकि इनमें भारी मात्रा में प्लास्टिक पदार्थ, रासयनिक कचरा और दूसरे कई प्रकार के नान बायोडिग्रेडबल कचरे मिल गये है।

3.भूमि प्रदूषण

वह औद्योगिक और घरेलू कचरा जिसका पानी में निस्तारण नही होता है, वह जमीन पर ही फैला रहता है। हालांकि इसके रीसायकल तथा पुनरुपयोग के कई प्रयास किये जाते है पर इसमें कोई खास सफलता प्राप्त नही होती है। इस तरह के भूमि प्रदूषण के कारण इसमें मच्छर, मख्खियां और दूसरे कीड़े पनपने लगते है, जोकि मनुष्यों तथा दूसरे जीवों में कई तरह के बीमारियों का कारण बनते है।

4.ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण कारखनों में चलने वाली तेज आवाज वाली मशीनों तथा दूसरे तेज आवाज करने वाली यंत्रो से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही यह सड़क पर चलने वाले वाहन, पटाखे फूटने के कारण उत्पन्न होने वाला आवाज, लाउड स्पीकर से भी ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है। ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों में होने वाले मानसिक तनाव का मुख्य कारण है, जोकि मस्तिष्क पर कई दुष्प्रभाव डालने के साथ ही सुनने की शक्ति को भी घटाता है।

5.प्रकाश प्रदूषण

प्रकाश प्रदूषण किसी क्षेत्र में अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे रोशनी उत्पन्न करने के कारण पैदा होता है। प्रकाश प्रदूषण शहरी क्षेत्रों में प्रकाश के वस्तुओं के अत्यधिक उपयोग से पैदा होता है। बिना जरुरत के अत्याधिक प्रकाश पैदा करने वाली वस्तुएं प्रकाश प्रदूषण को बढ़ा देती है, जिससे कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।

6.रेडियोएक्टिव प्रदूषण

रेडियोएक्टिव प्रदूषण का तात्पर्य उस प्रदूषण से है, जो अनचाहे रेडियोएक्टिव तत्वों द्वारा वायुमंडल में उत्पन्न होता है। रेडियोएक्टिव प्रदूषण हथियारों के फटने तथा परीक्षण, खनन आदि से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही परमाणु बिजली केंद्रों में भी कचरे के रुप में उत्पन्न होने वाले अवयव भी रेडियोएक्टिव प्रदूषण को बढ़ाते है।

7.थर्मल प्रदूषण

कई उद्योगों में पानी का इस्तेमाल शीतलक के रुप में किया जाता है जोकि थर्मल प्रदूषण का मुख्य कारण है। इसके कारण जलीय जीवों को तापमान परिवर्तन और पानी में आक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।

8.दृश्य प्रदूषण

मनुष्य द्वारा बनायी गयी वह वस्तुएं जो हमारी दृष्टि को प्रभावित करती है दृष्य प्रदूषण के अंतर्गत आती है जैसे कि बिल बोर्ड, अंटिना, कचरे के डिब्बे, इलेक्ट्रिक पोल, टावर्स, तार, वाहन, बहुमंजिला इमारते आदि।

प्रदूषण कम करने के उपायICT - Third Grade Abraham Lincoln: Environmental Issues

1. कार पूलिंग
2. पटाखों को ना कहिये
3. रीसायकल/पुनरुयोग
4. अपने आस-पास की जगहों को साफ-सुथरा रखकर
5. कीटनाशको और उर्वरकों का सीमित उपयोग करके
6. पेड़ लगाकर
7. काम्पोस्ट का उपयोग किजिए
8. प्रकाश का अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे उपयोग ना करके
9. रेडियोएक्टिव पदार्थों के उपयोग को लेकर कठोर नियम बनाकर
10. कड़े औद्योगिक नियम-कानून बनाकर
11. योजनापूर्ण निर्माण करके बायोडिग्रेडेबल उत्पादों का उपयोग करें। क्योंकि बायोडिग्रेडेबल कचरे का निपटान करना आसान है।
13. भोजन कीटनाशकों के उपयोग के बिना उगाया जाए, जैविक सब्जियां और फल उगाए जाए |
14. पॉली बैग और प्लास्टिक के बर्तनों और वस्तुओं के उपयोग से बचें। क्योंकि किसी भी रूप में प्लास्टिक का

निपटान करना मुश्किल है।
15. कागज़ या कपड़े की थैलियों का उपयोग करें ।
16. अलग-अलग डस्टबिन में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग निपटाने से कचरा अलग हो जाता है। भारत

सरकार ने पहले ही इस अभियान को शुरू कर दिया है और देश भर के विभिन्न शहरों में विभिन्न क्षेत्रों में कई

हरे और नीले डस्टबिन लगाए गए हैं।
17. कागज़ उपयोग को सीमित करें। कागज़ बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष कई पेड़ काटे जाते हैं। यह प्रदूषण का एक

कारण है। डिजिटल प्रयोग अच्छा विकल्प है।
18. पुन: उपयोग योग्य डस्टर और झाड़ू का उपयोग करें।
19. प्रदूषण हानि पहुँचाता है अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के इस बारे में जागरूक करें ।
20. घरों का कचरा बाहर खुले में नहीं फेंकना चाहिए।
21. खनिज पदार्थ् भी सावधानी से प्रयोग करने चाहिए ताकि भविष्य के लिये भी प्रयोग किये ज। सके ।
22. हमें वायु को भी कम दूषित करना चाहिए और अधिक से अधिक पेड पौधेलगाने चाहिये ताकि अम्लीय वर्षा को

रोकl जl सके ।
23. यदि हम बेहतर जीवन जीन| चाहते हैं और वातवरन मे शुध्ध्ता चाहते हैं वनो को सरन्क्षित करना होगा |
24. हमें ऐसी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए जिन्हें हम दोबारा से प्रयोग में ला सके।

What is Pollution, What are Different types of Pollution | TutorReal

प्रदूषण के कारण

  • बेकार पदार्थो की बढ़ती मात्रा और उचित निपटान के विकल्पों की कमी के कारण समस्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। कारखानों और घरों से बेकार उत्पादों को खुले स्थानों में रखा और जलया जाता है
  • जिससे भूमि, वायु , जल , ध्वनि प्रदूषित होते हैं| प्रदूषण विभिन्न मानवीय गतिविधियों के कारण और प्राकृतिक कारणों के कारण भी होता है।
  • कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग, औद्योगिक और कृषि के बेकार पदार्थो के निपटान के लिए विकल्पों की कमी, वनों की कटाई, बढ़ते शहरी करण, अम्लीय वर्षा और खनन इस प्रदूषण के मूल कारक हैं।
  • ये सभी कारक कृषि गतिविधियों में बाधा डालते हैं और जानवरों और मनुष्यों में विभिन्न बीमारियों का कारण भी बनते हैं। जनसंख्या वृद्धि भी कारण है बढ़ते हुए प्रदूषण’ का |

प्रदूषण के परिणाम

आज के समय की मुख्य चिंता है बढ़ता हुआ प्रदूषण | कचरा मैदान के आसपास दुर्गंध युक्त गंध के कारण सांस लेना दुर्भर होता है |और इसके

ICT - Third Grade Abraham Lincoln: Environmental Issues

आस पास का स्थान रहने लायक नहीं रहता | विभिन्न श्वास सम्बन्धी रोग उत्पन्न होते हैं | अपशिष्ट उत्पादों सेछुटकारा पाने के लिए जब इन्हे जलाया जाता है तो वायु प्रदूषित होती है |अपशिष्ट पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से त्वचा सम्बन्धी रोग, विषाक्त पदार्थविषैले जीव उत्पन्न करते हैं जो की जानलेवा रोगों के कारण बनते हैं | जैसे कि मच्छर, मख्खियाँ इत्यादि | कृषि खराब होती है और खाने पीने की वस्तुएँ खाने के लायक नहीं रहती |पीने का जल जो कि अमृत माना जाता था वह भी रोगो का साधन बन जाता है | ध्वनि जो की संगीत पैदा करती थी शोर बन करमानसिक असंतुलन पैदा करती है |धरती पर ग्रीन कवच भी बहुत कम लगभग तीन प्रतिशत ही बच है जो कि चिन्तनीय है |

निष्कर्ष

जितनी पृथ्वी पर हरियाली और पेड़ -पौधे खत्म होंगे उतना ही यह प्रदूषण अपनी चरम सीमा पर होगा। प्रदूषण को रोकने लिए अभी मानव जाति जागरूक हुई है लेकिन और जागरूक होने की आवश्यकता है।

जहाँ हम वृक्ष काटे वहां पांच पौधे अवश्य लगाए। लोगों में प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैलाये। कल -कारखानों का निर्माण मनुष्यों के घरों और सार्वजनिक जगहों से दूर हो ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। कल-कारखानों को ज़रूरी सुचना दी जाए की वह रसायनभरे तत्वों को सीमित मात्रा से प्रवाहित करे ताकि प्रकृति और उनके जीवो को कोई नुक्सान ना पहुंचे। हम सभी को यह निश्चित रूप से एक जुट होकर प्रदूषण कोजड़ से मिटाने की हर मुमकिन छोटी से छोटी कोशिश करनी चाहिए। प्रदूषण पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने के लिए मनुष्य को वह सारे कार्य बंद करने होंगे जो प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। पृथ्वी और प्रकृति के हित के लिए प्रदूषण को नियंत्रित करने की आवशयकता है।