वर्तमान समय की बात की जाए तो मुझे नहीं लगता कि आज के समय में किसी इंसान पर आँख मूँद पर विश्वाश किया जा सकता है | आज के समय में लोग अपने दुःख से दुखी नहीं बल्कि औरों की ख़ुशी से दुखी है तो वहाँ किसी पर भरोसा किया जाएं ऐसा सोचना भी ग़लत होगा | परन्तु किसी पर भरोसा न किया जा सके ये भी सही नहीं है |
इंसान पर भरोसा करना या न करना उसकी प्रवत्ति पर निर्भर करता है | जैसे एक हाथ की सभी उंगलियां बराबर नहीं होती वैसे ही सभी लोगों का स्वाभाव भी एक जैसा नहीं होता | सबका स्वाभाव अलग-अलग होता है | कुछ लोगों को स्वाभाव अच्छा होता है तो कुछ का स्वाभाव बुरा होता है |
विश्वास और अंधविश्वास -
जब हम किसी इंसान पर एक सीमा तक भरोसा करते हैं, उसकी हर वो बात मानते हैं जो सही है और उसका विरोध करते हैं जो सही नहीं है तो यह विश्वास होता है | अगर हम किसी इंसान पर इतना विश्वाश कर लें जिसके कारण हम उस इंसान की ग़लत बात को भी ग़लत न मानें और उसके सिवा हम किसी पर भी भरोसा न करें तो यह अन्धविश्वास कहलाता है |
अब फर्क इतना है कि आप ये जानें कि आप क्या चाहते हैं, विश्वास या अन्धविश्वास |
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