जिहाले मस्ती मुकुंद बरंदीश का क्या मतलब है? - letsdiskuss
Official Letsdiskuss Logo
Official Letsdiskuss Logo

Language



Blog

Ramesh Kumar

Marketing Manager | Posted on | others


जिहाले मस्ती मुकुंद बरंदीश का क्या मतलब है?


0
0





 
जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन बरंजिश , बेहाल-ए -हिजरा बेचारा दिल है
सुनाई देती है जिसकी धड़कन , तुम्हारा दिल या हमारा दिल है
 
 
 
( मुझे रंजिश से भरी इन निगाहों से ना देखो क्योकि मेरा बेचारा दिल जुदाई के मारे यूँही बेहाल है। जिस दिल कि धड़कन तुम सुन रहे हो वो तुम्हारा या मेरा ही दिल है )
Letsdiskuss कुछ ऐसी कशिश थी 'गुलामी ' के इस गाने में कि दिल और दिमाग में उतर गया। बाद में जब समझ और शौक आया तो जाना कि ये गाना  लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार ने गाया था। लेकिन गाने कि पहली लाइन क्या है ये कभी समझ नहीं आया। इसके बाद की लाइन  हिंदी में थी सो समझ आ जाती थी। कई साल तक इस गाने को मै " जिहाले मस्ती मुकुंद रंजिश" सुनती रही !
,गुगल की कृपा से मैंने एक साल पहले इस गाने की पहली लाइन समझी और ये जाना कि गुलज़ार ने ये गाना अमीर खुसरो कि एक बेहतरीन सूफियाना कविता से प्रेरित होकर बनाया था  
इस गाने की सबसे बेहतरीन लाईने जो मेरी पसंदीदा है ......
" वो आ के पहलु में ऐसे बैठे ,की शाम रंगीन हो गई है ,
जरा जरा सी खिली तबियत , जरा सी ग़मगीन हो गई है "
 
                                                                     .....वीरपाल
 
 

 


0
0

Picture of the author